Computer memory in Hindi: 2 types of computer memory in hindi

Computer memory in Hindi: 2 types of computer memory in hindi
Computer memory in Hindi

आज हम इस पोस्ट में जानेंगे कि Computer memory in Hindi से जुड़ी जानकारी देने वाले हैं दोस्तों आप मेमोरी के बारे में जानते ही होंगे कि मेमोरी का होना बहुत आवश्यक होता है। चाहे वह एक Human हो या एक कंप्यूटर मशीन। मेमोरी का होना सभी के लिय आवश्यक होता है।

ह्यूमन जो देखता है जो सोचता है बोलता है वह सब मेमोरी में स्टोर रहता है मनुष्य को कोई काम करना होता है तो वह मेमोरी का इस्तेमाल करता है। मेमोरी के बिना मनुष्य कुछ नहीं कर सकता इसी तरह Computer memory भी कार्य करती है।

डाटा और इंस्ट्रक्शन को स्टोर करना हो या कैलकुलेशन करना हो सभी में मेमोरी का प्रयोग किया जाता है। ह्यूमन में मेमोरी को एक ही नाम से जाना जाता है जिसे हम मस्तिक कहते हैं लेकिन Computer memory में यह दो प्रकार की होती है प्राइमरी मेमोरी और सेकेंडरी मेमोरी  इसे हम मेमोरी यूनिट भी कहते हैं जिसे 2 पार्ट में बांटा गया है प्राइमरी और सेकेंडरी मेमोरी।

Types of Computer memory in hindi

Computer memory दो प्रकार की होती है जी हँ दोस्तों Computer में मेमोरी दो प्रकार की होती हैं प्राइमरी मेमोरी और सेकेंडरी मेमोरी ।

Computer memory in Hindi srvshiksha
Computer memory in Hindi: 2 types of computer memory in hindi

 Primary : Computer memory in Hindi

प्राइमरी मेमोरी में डाटा और इंस्ट्रक्शन कुछ समय के लिए स्टोर रहता है पावर ऑफ होने के बाद मेमोरी से डाटा destroy हो जाता है। प्राइमरी मेमोरी को Main मेमोरी और टेंपरेरी मेमोरी के नाम से भी जानते हैं। प्राइमरी मेमोरी बहुत ज्यादा expensive होती है और इनका साइज भी छोटा होता है प्राइमरी मेमोरी सेकेंडरी मेमोरी से ज्यादा फास्ट होती है कंप्यूटर में हम जो वर्क करते हैं। वह प्राइमरी मेमोरी द्वारा किया जाता है

कंप्यूटर पर हम जो भी वर्क करते हैं वह कुछ समय के लिए प्राइमरी मेमोरी में save रहता है इसमें डाटा को हम लंबे समय के लिए store नहीं कर सकते प्राइमरी memory दो प्रकार की होती है Volatile मेमोरी और non Volatile मेमोरी । 

Volatile : Computer memory in Hindi

प्राइमरी मेमोरी को ही वोलेटाइल मेमोरी कहा जाता है। इसमें डाटा और instruction कुछ समय के लिए रखा जा सकता है RAM  एक  Volatile Memory का टाइप होता है। 

RAM 

RAM  की फुल फॉर्म Random access memory  होती है  रैम मेमोरी सेकेंडरी मेमोरी से ज्यादा फास्ट होती है। RAM एक साथ डाटा को रीड और राइट कर सकती है RAM की Read/Write करने की स्पीड बहुत फास्ट होती है यह काफी ज्यादा expensive होती है 

RAM का साइज  Max 32GB है। RAM  में डाटा टेंपरेरी समय के लिए स्टोर रहता है जब तक कंप्यूटर ऑन रहता है तब तक डाटा रैम में स्टोर रहता है। कंप्यूटर ऑफ हो जाने के बाद रैम से डाटा erased (destroy) हो जाता है कंप्यूटर में RAM दो प्रकार की होती है स्टैटिक  रैम (Static RAM) और डायनामिक रैम (Dynamic RAM).

  1. SRAM 

SRAM  को Static Random access memory   कहते हैं SRAM  मेमोरी को हमें बार-बार रिफ्रेश करने की जरूरत नहीं पड़ती है स्टैटिक मेमोरी बहुत Fast होती है। और यह पावर को कम कंज्यूम करती है क्योंकि इसमें हमें बार-बार रिफ्रेश नहीं करना पड़ता है SRAM का प्रयोग Cache मेमोरी में किया जाता है और इसका सबसे ज्यादा प्रयोग सुपर कंप्यूटर आदि में किया जाता है।

  1. DRAM

DRAM को डायनामिक रेंडम एक्सेस मेमोरी (Dynamic random-access memory) कहा जाता है  DRAM को बार-बार refresh करने की जरूरत पड़ती है। आज के समय में जो कंप्यूटर आ रहे हैं उनमें DRAM का प्रयोग किया जाता है। जैसे PC, लैपटॉप आदि का प्रयोग आज हर घर में किया जा रहा है। क्योंकि यह SRAM से काफी सस्ती होती है DRAM पावर को ज्यादा कंज्यूम करती है क्योंकि इसे बार-बार रिफ्रेश करने की आवश्यकता पड़ती है। यही कारण है कि DRAM की स्पीड SRAM से slow होती है और यह पावर भी ज्यादा कंज्यूम करती है।

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Non Volatile Computer memory in Hindi

नॉन वोलेटाइल मेमोरी वह मेमोरी होती है जिसमें डाटा परमानेंटली स्टोर रहता है जैसे ROM रीड ओनली मेमोरी एक नॉन वोलेटाइल मेमोरी का उदाहरण है।

ROM:

ROM की फुल फॉर्म Read-only memory होती है इसका मतलब होता है कि हम सिर्फ डाटा और इंस्ट्रक्शन को Read कर सकते है  ROM में जो डाटा स्टोर होता है। वह परमानेंटली ROM में रहता है ROM में जो डाटा और इंस्ट्रक्शन होती है उसे केवल CPU पड़ सकता है लेकिन उसे destroy नहीं कर सकता ROM में स्टोर डाटा को  destroy नहीं किया जा सकता है

ROM के उदहारण वाशिंग मशीन, टीवी, टीवी रिमोट, Bike, कार आदि में ROM मेमोरी का प्रयोग किया जाता हैं।

ROM में पावर ऑफ होने पर ROM का डाटा  destroy नहीं होता है। BIOS से  संबंधित इंफॉर्मेशन ROM में स्टोर होती है जब कंप्यूटर ऑन होता है। तो सबसे पहले bios Call होता है। हार्डवेयर से रिलेटेड इंफॉर्मेशन BIOS में store रहती है ROM की डाटा लिखने की स्पीड स्लो होती है ROM तीन प्रकार की होती है।

PROM:

PROM  की फुल फॉर्म programmable read only memory होता है। PROM एक प्रकार की ROM होती है मतलब ROM के अंदर एक Program है ROM के अंदर एक पहले से Program set होता है इसलिए इसे PROM कहते हैं।

PROM  की फुल फॉर्म programmable read only memory होता है PROM  एक कंप्यूटर की मेमोरी चिप होती है जिसे एक बार प्रोग्राम किया जाता है। मतलब जब कंप्यूटर बनकर तैयार होता है उसी समय PROM मैं डाटा और इंस्ट्रक्शन को  स्टोर या प्रोग्राम किया जाता है। PROM  मैं एक बार डाटा ढलने के बाद डाटा डिस्ट्रॉय नहीं किया जा सकता है PROM  को Wen Tsing  ने बनाया था आज के समय में PROM  का प्रयोग नहीं किया जाता है। 

EPROM: 

Erasable programmable read only memory  शार्ट में इसे Erasable ROM  कहते हैं EPROM भी एक नॉन वोलेटाइल मेमोरी होती है। लेकिन EPROM को हम दोबारा से प्रोग्राम या reprogram कर सकते हैं। और डाटा एंड इंस्ट्रक्शन को EPROM में स्टोर कर सकते हैं। EPROM को इसी लिए बनाया गया था। कि इसे हम फिर से डाटा और इंस्ट्रक्शन को reprogram कर सकें।

EPROM के अंदर का डाटा और इंस्ट्रक्शन को डिस्ट्रॉय किया जा सकता है। लेकिन यह बहुत मुश्किल होता है क्योंकि EPROM को पहले कंप्यूटर से निकाला जाता है। फिर इसके अंदर का डाटा ultraviolet light के द्वारा मिटाया जाता है फिर इसके अंदर नया डाटा और इंस्ट्रक्शन को डाला जाता है। आज के समय में EPROM  का यूज़ कम होता है इसकी जगह EEPROM का किया जाता है EPROM  को Dov frohman  ने 1971 में इन्वेंट किया था।

EEPROM:  Electrical Erasable programmable read only memory

EEPROM को हम कई बार रिप्रोग्राम कर सकते हैं EEPROM का डाटा और इंस्ट्रक्शन एक इलेक्ट्रिक चार्ज द्वारा Erage किया जाता है EEPROM का डाटा तब तक destroy नहीं होता है। जब तक हम उसे फिर से रिप्रोग्राम ना करें पावर ऑफ होने से EEPROM  के data पर कोई फर्क नहीं पड़ता है EEPROM को geore perlegos ने 1978 में बनाया था जिसका यूज़ आज सबसे ज्यादा होता है। 

EEPROM को आज हम पेनड्राइव के रूप में जानते हैं EEPROM के अंदर का डाटा एक कंप्यूटर द्वारा आसानी से destroy किया जा सकता है EEPROM को बार-बार प्रोग्राम किया जा सकता है।

2. Secondary Computer memory in Hindi

सेकेंडरी मेमोरी में डाटा और इंस्ट्रक्शन लंबे समय के लिए स्टोर करके रख सकते हैं।  secondary memory में डाटा को परमानेंट के लिय store करके रखा जाता है secondary memory को बार-बार रिफ्रेश करने की जरूरत नहीं पड़ती है। Secondary memory प्रायमरी मेमोरी से सस्ती होती है और speed भी प्राइमरी मेमोरी से कम होती है। सेकेंडरी मेमोरी में large डाटा को स्टोर कर सकते हैं  secondary memory के उदाहरण हार्ड डिस्क, फ्लॉपी डिस्क, पेन ड्राइव, सीडी एंड डीवीडी, एसडी कार्ड आदि।

Secondary memory तीन प्रकार की होती है 

1. Magnetic Storage 

Magnetic ड्राइव Magnetic मैटेरियल की बनी होती है जैसे हार्डडिस्क और floppy disk  यह disk Magnetic डिस्क से बनी होती है और इनकी कैपेसिटी भी काफी ज्यादा होती है।

Hard Disk:

हार्ड डिस्क ड्राइव Magnetic मैटेरियल की बनी होती है हार्ड डिस्क के अंदर के डाटा को रीड राइट करने के लिए एक रीड राइट हेड होता है। हार्ड डिस्क की कैपेसिटी बहुत ज्यादा होती है इसकी डाटा की read/write करने की स्पीड काफी फास्ट होती है। हार्ड डिस्क ड्राइव लॉट्स ऑफ़ अमाउंट में डाटा को store कर सकते हैं हार्ड डिस्क का प्रयोग डेक्सटॉप, लैपटॉप, कंप्यूटर आदि में किया जाता है। 

हार्ड डिस्क की स्पीड 200 एमबी पर सेकंड होती है HardDisk के अंदर के डाटा को read/write करने के लिए एक रीड राइट आर्म (Arm) लगा होता है जो डाटा को रीड राइट करता है HardDisk मैग्नेटिक platter होती है जिसके दोनों साइड डेट और इंस्ट्रक्शन स्टोर रहते हैं।

Flopy Disk 

फ्लॉपी डिस्क की बाहरी परत प्लास्टिक की बनी होती है यह लेकिन इन्हें है एक Magnetic मैग्नेटिक मैटेरियल की होती है इसको इसका रीड राइट हैंड metal flap से कवर रहता है। फ्लॉपी डिस्क बहुत कम पॉपुलर डिस्क है क्योंकि यह आसानी से डैमेज हो जाती है और इसका साइज भी बहुत कम होता है इसमें डाटा को हम ज्यादा से ज्यादा 3 – 4 एमबी डाटा को store स्टार्ट कर सकते हैं।

Magnetic Tape:

Magnetic मैग्नेटिक टेप Magnetic मैग्नेटिक मैटेरियल की बनी होती है और यह लॉन्ग प्लास्टिक strip  होती है  इसमें हम बहुत सारे डेटा को store कर सकते हैं लेकिन यह बहुत slow होती है लेकिन यह और डिवाइस से काफी सस्ती होती है Magnetic Tape के अंदर का data डाटा को हम serial by serial  access कर सकते हैं Magnetic मैग्नेटिक टेप पुराने समय की कैसेट की तरह दिखाई देती है। 

2. Optical Storage : Computer memory in Hindi

ऑप्टिकल स्टोरेज तीन प्रकार के होते हैं 

  1. CD-ROM
  2. DVD-ROM
  3. Blu-ray

CD-ROM:

सीडी रोम की फुल फॉर्म Compact Disk – Read Only Memory (CD-ROM)  होती है  यह एक प्रकार की रोम होती है CD-ROM में हम 700mb तक डाटा को स्टोर कर सकते हैं। सीडी रोम में up to 80 मिनट ऑडियो  रिकॉर्ड कर सकते हैं CD-ROM  का प्रयोग ऑडियो एंड डाटा स्टोर करने के लिए किया जाता है  यह डिवाइस सबसे जल्दी खराब हो जाते हैं। 

CD-ROM में डाटा को हम रीड और राइट भी कर सकते हैं लेकिन जो CD-ROM पहले से Filled होती है। उनके अंदर का डाटा को हम ना ही डिलीट कर सकते हैं और ना ही मॉडिफाई कर सकते हैं CD-ROM का प्रयोग 1982 से किया जा रहा है।

DVD-ROM:

Digital Versatile Disk – Read Only Memory. DVD ROM  भी CD-ROM की तरह ही होती है लेकिन इसकी Quality और डाटा को स्टोर करने की capacity CD-ROM से ज्यादा होती है। CD and DVD ROM का डाटा एक सेंसर द्वारा रीड किया जाता है DVD ROM  मैं 4.7GB डाटा को स्टोर करने की कैपेसिटी होती है। 

DVD-R का मतलब,  DVD ROM के अंदर  का डाटा हम केवल Read कर सकते हैं Write नहीं

DVD-RW का मतलब, इस प्रकार की dvd-rom  के अंदर के डाटा को हमें डिस्ट्रॉय, डिलीट, मॉडिफाई आदि कर सकते हैं DVD ROM का प्रयोग 1995 से किया जा रहा है।

Blu-Ray: 

Blu-ray भी एक ऑप्टिकल disc है जिसका प्रयोग high definition वीडियो और बहुत बड़े डाटा को स्टोर करने के लिए बनाया गया था। इसमें हम 25GB डाटा को स्टोर कर सकते हैं Blu-ray का प्रयोग पहली बार 2006 में किया गया और यह ऑप्टिकल स्टोरेज की ले टेस्ट टेक्नोलॉजी है Blu-ray क्वालिटी और कैपेसिटी CD and DVD ROM से काफी ज्यादा है।

3. Flash Storage : Computer memory in Hindi

फ्लैश स्टोरेज EPROM और EEPROM का कॉमिनेशन है Flash memory एक प्रकार की नॉन वोलेटाइल मेमोरी होती है फ्लैश स्टोरीज को electrically erased किया जाता है। इसे हम बहुत आसानी से रिप्रोग्राम कर सकते हैं फ्लैश स्टोरेज का प्रयोग पेनड्राइव और SD card  के रूप में किया जाता है Flash Storage मेमोरी सबसे सस्ती मेमोरी होती है Flash Storage का साइज बहुत छोटा होता है इसे हम कहीं भी ले जा सकते हैं यह बहुत पोर्टेबल होती है।

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